इसके साथ एक समस्या और सामने आई है। जदयू के साथ आने के बाद सीटों की संख्या फिर से तय होने के साथ हर दल के हिस्से की सीटों को नए सिरे से चिन्हित किया जाना है। इसमें लोजपा की सीटें भी प्रभावित हो रही है। यह बीजेपी के लिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अभी उसके 22 सदस्य हैं, जबकि गठबंधन के बाद 17 सीटें ही हिस्से में आई हैं। ऐसे में पांच सदस्यों की सीटें कटना तय है। वहीं जदयू सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर 2009 के फार्मूले के आधार पर सीटों का बंटवारा करने के लिए दबाव बना रही है।
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