वर्तमान में रीयल एस्टेट संपत्तियों के उन खरीदारों पर जीएसटी नहीं लगता है, जिन्हें बिक्री के समय कार्य-पूर्ण होने का प्रमाणपत्र मिल चुका है। वहीं, जिसे प्रोजेक्ट को कार्यपूर्ण होने का प्रमाण पत्र नहीं मिला है उसमें फ्लैट खरीदने पर खरीदार को 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी चुकाना होता है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी परिषद की पिछली बैठक के बाद कहा था कि अगली बैठक में आवासीय संपत्तियों के लिए कर की दर को तर्कसंगत बनाने और एमएसएमई के लिए छूट सीमा को मौजूदा 20 लाख रुपये से बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बैठक में निर्माणाधीन प्रॉपर्टी पर जीएसटी की दर घटाने का फैसला हो सकता है।
प्रॉपर्टी एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद से निर्माणाधीन फ्लैट की बिक्री काफी कम हो गई थी। इसकी वजह तैयार फ्लैट जीएसटी के दायरे से बाहर होना और निर्माणाधीन फ्लैट पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाना था। इसलिए घर खरीदार बन कर तैयार घर खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं। जीएसटी क्रियान्वयन की वजह से घरों की बिक्री घटी है। साल 2018 में नए घरों की आपूर्ति पिछले साल की तुलना में 22 प्रतिशत घटकर 1.9 लाख यूनिट्स रह गई।
अगर अभी कोई खरीदार चार हजार रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से फ्लैट खरीदता है और 12% की दर से जीएसटी भुगतान करता है तो 480 रुपये प्रति वर्ग फीट कर चुकाना होता है। वही 4 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट के फ्लैट पर 5% की दर से जीएसटी चुकाने पर 200 रुपये चुकाने होंगे। इस तरह 280 रुपये की बचत होगी।
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