हार्दिक के साथ राजद्रोह के एक मामले में सह-आरोपी और पास नेता की वर्ष 2015 में रहस्यमय गुमशुदगी के दौरान उनके लिए आधी रात को यहां हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले बांभणिया ने कहा कि हार्दिक ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान एक कांग्रेस टिकट के लिए पार्टी को बिना अन्य पास नेताओं की जानकारी के एक गुपचुप सूची सौंपी थी जिसमें उनकी करीबी आशाबेन का नाम भी था।
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