विशेषज्ञों ने कहा, ''इस बजट का परिपेक्ष्य यह है कि पिछले 37 महीने से अर्थव्यवस्था गिर रही है. कोविड के दौरान बिना सोचे समझे लॉक डाउन करने यह और बढ़ गया. सरकार ने अपने इस घाटे को कर्जा लेकर पूरा किया. इस बजट में सरकार का एक ही लक्ष्य है कि किस तरह से घर का सोना गिरवी रखकर घाटे को पूरा किया जाए. सरकार के पास जो जमीन पड़ी है और सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों को बेचकर अपना घाटा पूरा करना चाहती है''
''लोगों के हाथ में पैसा नहीं है इसलिए अर्थव्यवस्था नहीं चल रही है. एक बड़े वर्ग को खाने के लाले पड़े हैं. अभी जो पैसा दिया जा रहा है वो पर्याप्त होता तो जीपीडी लगातार नीचे क्यों जा रही है. इसका मतलब है कि सरकार जो कदम उठा रही है वो पर्याप्त नहीं है. सरकार करती है कि कोरोना काल में बीस लाख करोड़ का पैकैज दिय. लेकिन इसमें सिर्फ साढ़े तीन लाख करोड़ सीधे पैसे दिए.
Digital Desk: Firoz Khan
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