1991 से बाद के इस कालखंड में चीन के साथ उनके रिश्तों में ज़बरदस्त तेज़ी
(India)
सोवियत संघ के ज़माने में कज़ाक, किर्गी और ताजिक सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक के साथ चीन की सीमाएं स्पष्ट नहीं थीं. इसके चलते बीजिंग और मॉस्को के बीच तनावपूर्ण हालात रहा करते थे. सोवियत संघ के विघटन और कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान की आज़ादी के फ़ौरन बाद चीन ने इन तीनों मध्य एशियाई देशों और रूसी फ़ेडरेशन के साथ अपनी सरहद को स्थायी और अंतिम स्वरूप दे दिया.
चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात के बाद ईरानी विदेश मंत्री ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि पिछले साल 'ईरान-चाइना 25-इयर कोऑपरेशन प्रोग्राम' पर हस्ताक्षर हुआ था और अब इसे लागू करने की बारी है.चीन ने इससे पहले ओमान और क़तर के विदेश मंत्री की आगवानी की थी. इसके अलावा गल्फ़ अरब देशों का एक प्रतिनिधिमंडल भी आया था.

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