नितेश तिवारी इस पौराणिक कथा को बड़े पर्दे पर पेश कर रहे हैं। इस पर रामानंद सागर के बेटे, प्रेम सागर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने कहा कि हर व्यक्ति के मन में अपनी एक रामायण होती है, और अगर कोई निर्देशक अपनी कल्पना से इसे पेश करता है, तो उसे तुरंत सही या गलत ठहराना ठीक नहीं, बल्कि एक रचनात्मक प्रयास के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने माना कि आज की युवा पीढ़ी विजुअल इफेक्ट्स और ग्राफिक्स से जुड़ती है, इसलिए अगर राम का नाम इस माध्यम से युवाओं तक पहुंचता है, तो यह सकारात्मक बात है। उनके अनुसार, अगर किसी की कल्पना में राम पेड़ पर चलते हैं, तो वह उनकी सोच है और हर कलाकार को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रचनात्मक आज़ादी का मतलब यह नहीं कि धार्मिक किरदारों की जड़ें ही हिला दी जाएं। 'आदिपुरुष' का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उसमें रावण को जिस तरह दिखाया गया, वह पूरी तरह गलत था, क्योंकि रावण कोई मांसाहारी या क्रूर राक्षस नहीं था, बल्कि वह एक ज्ञानी, तपस्वी और शिवभक्त ब्राह्मण था, जिसे प्रभु श्रीराम ने स्वयं यज्ञ संपन्न कराने के लिए आमंत्रित किया था। रामेश्वरम में होने वाली पूजा इसी भावना और परंपरा की याद दिलाती है। प्रेम सागर ने अंत में कहा कि जब ऐसे महान पात्रों को गलत तरीके से दिखाया जाता है, तो जनता उसे नकार देती है, और 'आदिपुरुष' इसका बड़ा उदाहरण है।
Author: JAN TV Editorial Team
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