महिलाओं से जुड़ी फिजिकल कॉमेडी पर बात करते हुए चित्रांगदा ने माना कि कई बार ऐसे सीन असहज महसूस कराते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में अक्सर महिलाओं को पहले ग्लैमरस भूमिकाओं में खुद को साबित करना पड़ता है, हालांकि वह इस सोच को सही ठहराने की कोशिश नहीं कर रहीं। उनके मुताबिक, कॉमेडी एक पेचीदा जॉनर है—कुछ चुटकुले दर्शकों को हंसाते हैं, तो कुछ नहीं। जब मज़ाक असर नहीं छोड़ता, तब आलोचना स्वाभाविक हो जाती है।
फिल्म धुरंधर पर हो रही आलोचनाओं को लेकर चित्रांगदा ने कहा कि हर जॉनर की अपनी भाषा और शैली होती है। कुछ दर्शक फिल्मों को सिर्फ हिंसा के नजरिये से देखते हैं, लेकिन वह भी कहानी कहने का एक तरीका है। आखिरकार फिल्म देखना या न देखना दर्शकों के विवेक पर निर्भर करता है। वर्कफ्रंट की बात करें तो चित्रांगदा जल्द ही सलमान खान के साथ बैटल ऑफ गलवां में नजर आएंगी, जिसका टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है।
Author: JAN TV Editorial Team
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