सिसोदिया ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को लिखे पत्र में कहा कि वे न तो स्वयं और न ही अपने वकील के माध्यम से अदालत में पेश होंगे। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं है और अब उनके पास सत्याग्रह का रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
इससे एक दिन पहले Arvind Kejriwal ने भी इसी मामले में न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत में पेश होने से इनकार किया था। उन्होंने न्यायाधीश पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए सुनवाई से अलग होने की मांग की थी।
हालांकि, 20 अप्रैल को अदालत ने केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी थी और न्यायमूर्ति शर्मा ने खुद को मामले से अलग करने से इनकार कर दिया था।
ताजा घटनाक्रम के बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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