निचली अदालतों में कॉलेजियम सिस्टम के बजाय किसी दूसरे तरीके से जजों की नियुक्ति पर सरकार गंभीर हो गई है। सोमवार को मशहूर न्यायविदों के साथ हुई बैठक में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने साफ कहा कि कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया है। सरकार नई प्रणाली पर विचार कर रही है, लेकिन न्यायपालिका की स्वतंत्रता हर हाल में बरकरार रहेगी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के तरीके पर बहस तेज हो गई है। सरकार का मानना है कि मौजूदा कॉलेजियम सिस्टम की जगह ज्यूडिशियल एपॉइंटमेंट कमीशन बनाया जाना चाहिए। लेकिन सवाल है कि इसका प्रारूप क्या हो। इसी पर मंथन के लिए सोमवार शाम तमाम न्यायविदों के साथ विचार-विमर्श किया गया। अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी के मुताबिक ज्यादातर न्यायविद कॉलेजियम सिस्टम बदलने के पक्ष में हैं। सरकार का भी कहना है कि इस मामले पर विचार-विमर्श जारी है। अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में पिछली मनमोहन सरकार ने भी कॉलेजियम सिस्टम को बदल कर ज्यूडिशियल एपोंइटमेंट कमीशन बिल लाने की पहल की थी। बिल में प्रावधान था कि जजों की नियुक्ति के लिए छह सदस्यीय कमिशन बनाया जाए। इसमें चीफ जस्टिस के अलावा दो सीनियर जज, कानून मंत्री और दो प्रमुख न्यायविदों को भी रखा जाए।
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