(International)
न्यूयार्क के बारूख कॉलेज में एशियन हिस्ट्री एण्ड रिलीजन के एसोसिएट प्रोफेसर तानसेन सेन ने कहा, ‘पारस्परिक जागरूकता, विश्वास और समझ की कमी है। हम चीन को नहीं समझते और चीनी हमें नहीं।’ सेन ने मेलबर्न स्थित ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट में ‘निदर फ्रेंड्स नोर राइवल्स : द काम्प्लेक्सिटीज ऑफ कंटेपररी इंडिया-चाइना रिलेशंस’ विषय पर व्याख्यान में ये बातें कहीं। यह व्याख्यान चीन-भारत के संबंधों के अलग अलग पहलुओं की समीक्षा के लिए आयोजित किया गया था। सेन ने कहा कि दोनों देशों के प्रयासों के बावजूद भारत-चीन संबंधों को लेकर एक नकारात्मक धारणा बन रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि अगर सीमा मुद्दा हल हो भी हो गया तो भी समस्याओं पर ध्यान ना देने पर वह आगे भी बनी रहेंगी। सेन ने कहा कि दोनों देशों के आकार को देखते हुए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच 65 अरब डॉलर का व्यापार ‘बहुत कम’ है। उन्होंने हालांकि उम्मीद जतायी कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली नयी सरकार चीन को लेकर भारत की विदेश नीति को नयी गति देगी।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।