यह पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा के निकट सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण बेस होगा। इसके बाद मिसाइल का परिवहन नहीं करना पड़ेगा, युद्ध के दौरान इस बेस की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। यहां से युद्ध अथवा आपात स्थिति में क्विव रेसपांस मिल सकेगा। यहां बनने वाले मिसाइल बेस की भूमिका भी दोहरी होगी,ये लंबी दूरी के लिए लॉचिंग पेड तो होगा ही,साथ ही पडोसी देश की मिसाइल हरकतों पर नजर भी रख सकेगा।
यहां से 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में दुश्मन के मिसाइल हमले को रोकने में सक्षम होगा । वहीं 2000 किमी.की रेंज में दुश्मन की मिसाइल की पहचान भी कर लेगा। डीआरडीओ से मिली जानकारी के अनुसार पश्चिमी सीमा के निकट वर्तमान में गुजरात में मिसाइल बेस है। अब राजस्थान में पाली के सेंदड़ा और अलवर के खोआ में भी मिसाइल बेस बनेगा। डीआरडीओ दोनों स्थानों पर मिसाइल को ट्रैक करने वाला राडार लगाएगा ।
Author: JAN TV Editorial Team
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