पत्र में उन्होंने लिखा है कि दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच मुक़दमे की सुनवाई के दौरान मैंने अपमानित महसूस किया इसलिए सुप्रीम कोर्ट में वकालत छोड़ने का फैसला लिया है। वो आगे से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के तौर पर कभी पेश नहीं होंगे। गौरतलब है कि दिल्ली और केंद्र के मामले की सुनवाई से एक दिन पहले अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में सुनवाई जारी रखने का विरोध करते हुए राजीव धवन ने कोर्ट छोड़कर जाने की धमकी भी दी थी। पिछले बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकीलों के कोर्ट मे ऊंची आवाज़ मे बहस करने पर नाराज़गी जताई थी और कहा था कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उसके एक दिन पहले दिल्ली और केंद्र के बीच मुक़दमे की सुनवाई मे राजीव धवन की कुछ दलीलों के तरीक़े पर कोर्ट सहमत नहीं था।
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