महंगे डीजल से ईधन खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी से चिंतित रेलवे ने अब विद्युतीकरण की रफ्तार तेज करने का फैसला किया है। महंगे डीजल के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान रेलवे के ईधन खर्च में साढ़े छह हजार करोड़ रुपये का इजाफा होने का अनुमान है। रेलवे बोर्ड के सदस्य (बिजली), कुलभूषण के मुताबिक पिछले साल ईधन पर कुल खर्च 28,500 करोड़ रुपये था। इसमें बिजली पर 9,600 करोड़ रुपये, जबकि डीजल पर 18,900 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है। डीजल पर खर्च बढ़ने का प्रमुख कारण इसकी कीमत में हर माह होने वाली पचास पैसे की बढ़ोतरी है। इसके चलते चालू वित्त वर्ष में रेलवे का ईधन खर्च 35 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक रहने की आशंका है। यही वजह है हमने विद्युतीकरण की रफ्तार बढ़ाने का निर्णय किया है। अभी साढ़े 65 हजार रूट किलोमीटर (किमी) रेलवे लाइनों में केवल लगभग 21 हजार रूट किमी लाइनें (लगभग 32 फीसद) ही विद्युतीकृत हैं। फिलहाल हर साल पांच-छह सौ किलोमीटर लाइनों का विद्युतीकरण होता है। परंतु अब इसे बढ़ाकर कम से कम एक हजार किलोमीटर किया जाएगा। इससे सभी प्रमुख रूटों पर डीजल के बजाय बिजली वाली गाड़ियां चलाना संभव हो सकेगा। इस लक्ष्य को पाने के लिए रेलवे ने अपने खुद के परंपरागत तथा नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों का काम भी तेज कर दिया है।
Author: JAN TV Editorial Team
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