नरेंद्र मोदी सरकार ने ‘सबके लिए स्वास्थ्य सुविधा’ का जो वादा किया था, उसके पहले चरण में इस साल के अंत तक 50 जरूरी दवाओं को मुफ्त में मुहैया कराने की व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को इस बारे में एक प्रस्ताव भेजा है। इसमें इस कार्यक्रम के लिए इस साल 500 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। मंत्रालय ने अभी इस कार्यक्रम के तहत 50 जरूरी दवाओं की लिस्ट नहीं बनाई है, लेकिन मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि इनमें एंटीबायोटिक्स, एंटी-हाइपरटेंसिव्स और एंटी-डायबिटीज ड्रग्स होंगी। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, श्इस कार्यक्रम पर काम चल रहा है। अभी हालांकि दवाओं के नाम नहीं बताए जा सकते हैं। विशेषज्ञों की एक समिति यह लिस्ट बनाएगी। हालांकि इसमें बुखार, कफ, जुकाम, रैबीज जैसे रोगों के इलाज की दवाएं जरूर होंगी।श् ये दवाएं उन लोगों को मुफ्त मिलेंगी, जो पब्लिक हेल्थकेयर फैसिलिटीज का उपयोग करते हैं। मंत्रालय की योजना है कि 10 अगस्त तक फ्री ड्रग्स स्कीम का फॉर्म्यूला तय कर दिया जाए, राज्यों से इस पर नवंबर तक प्रस्ताव मंगा लिए जाएं और अगर बजटीय मंजूरी मिल जाए तो दिसंबर से योजना लागू कर दी जाए। योजना आयोग के एक विशेषज्ञ समूह के अनुसार, पब्लिक हेल्थ फैसिलिटीज में दवाएं मुफ्त मुहैया कराने के लिए सरकार को सालाना 6,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
Author: JAN TV Editorial Team
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