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पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख जरदारी ने शरीफ से प्रधानमंत्री आवास पर मुलाकात की। दोनों ने किसी भी सूरत में लोकतंत्र की रक्षा करने का संकल्प लिया। यह भी फैसला किया गया है कि शरीफ इस्तीफा नहीं देंगे जिसकी इमरान और कादरी मांग कर रहे है। राजनीतिक संकट को खत्म करने के प्रयास के तहत जरदारी दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी के मुख्यालय भी गए और वहां इसके प्रमुख सिराजुल हक से मुलाकात की। करीब तीन दशक में ऐसा पहली बार हुआ कि पीपीपी का कोई प्रमुख जमात-ए-इस्लामी के मुख्यालय गया हो। शरीफ-जरदारी की मुलाकात के बाद वित्त मंत्री इसहाक डार ने बताया कि जरदारी ने भरोसा दिलाया है कि वह संविधान और कानून के मुताबिक इस संकट का समाधान करने के लिए शरीफ का पूरा सहयोग करेंगे। डार ने कहा, ‘नवाज शरीफ ने जरदारी का अपने आवास पर स्वागत किया। जरदारी साहब ने मियां साहब को भरोसा दिया कि प्रदर्शनकारी दलों के साथ मुद्दों को हल करने में वह पूरी मदद करेंगे।’ यह पूछे जाने पर कि जरदारी ने क्या शरीफ से इस्तीफा देने के लिए कहा तो डार ने कहा, ‘प्रधानमंत्री के इस्तीफा देने का सवाल नहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री को पूरा सहयोग देने की बात कही है।’ वित्त मंत्री डार ने कहा कि सरकार पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान की छह मांगों को पहले ही मान चुकी है और ऐसे में उन्हें प्रदर्शन खत्म करना चाहिए। रेल मंत्री ख्वाजा साद रफीक ने कहा, ‘यह सरकार पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र एवं संविधान पर हमला है।’ पीपीपी के महासचिव सरदार लतीफ खोसा ने कहा, ‘देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए प्रधानमंत्री को किसी भी हद तक यहां तक की बड़ी कुबार्नी तक जाना चाहिए।’
Author: JAN TV Editorial Team
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