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एजेंसियां अब इस तथ्य पर जांच कर रही है। मौलाना असीम उमर के लिए पहले कहा जा रहा थ कि वह पाकिस्तानी है, लेकिन अब यह माना जा रहा है कि 1990 के दशक में भारत छोड़ कर जाने से पहले वह देओबंद स्थित मशहूर दर-उल-उलूम सेमिनरी से पढ़ा हुआ हो सकता है। इस मामले में जांच अभी जारी है। गौरतलब है कि वॉशिंगटन-डीसी के थिंक टैंक को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह बता चुके हैं कि भारत में आतंकवाद निर्यात किया हुआ है होम-ग्रोन नहीं है। यूपी पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने 1990 के दशक में भारत में हुए इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े लोगों से पूछताछ की है और उस समय के बाद वहां से देश छोड़ कर गए लोगों की सूची भी मांगी है। इंटेलिजेंस सूत्रों के मुताबिक यह जांच स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के उन पूर्व सदस्यों पर केंद्रित है जिन्होंने बाद में अल-कायदा और तालिबान का समर्थन किया। अधिकारी ने बताया, "अभी तक इस मामले में ज्यादा जानकारी हासिल नहीं हो सकी है, लेकिन अभी तक जितनी डिटेल हमारे पास है उसके आधार पर हमें लगता है कि मौलाना उमर भारत मूल का हो सकता है।"
Author: JAN TV Editorial Team
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