द. चीन सागर मामला: भारत के साथ दिए संयुक्त बयान पर अमेरिका कायम
(International) विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने बताया कि मेरे विचार से इस मुद्दे पर हमारा रूख बदला नहीं है। आप इससे अवगत हैं लेकिन हम क्षेत्र में नौवहन संबंधी मुद्दों के हल के लिए देशों के साथ निश्चित रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कल संवाददाताओं को बताया कि बेशक, भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार है और इस पर चर्चा होना स्वाभाविक है। लेकिन कुछ दिन पहले जब प्रधानमंत्री यहां आए थे तब यह हमारी बैठकों में हुई चर्चा का नतीजा भी रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ 30 सितंबर को हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में पहली बार दक्षिण चीन सागर (एससीएस) विवाद का सीधा संदर्भ दिया गया। बयान में कहा गया था कि नेताओं ने नौवहन भूभागीय विवादों को लेकर बढ़ते तनाव के बारे में चिंता जाहिर की और नौवहन सुरक्षा के महत्व तथा पूरे क्षेत्र में, खास कर दक्षिण चीन सागर में नौसंचालन एवं उड़ान की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने बयान में सभी पक्षों से अपने अपने दावे आगे बढ़ाने में बल प्रयोग की धमकी देने या उसके उपयोग से बचने तथा क्षेत्र में शांतिपूर्ण समाधान तलाशने में मदद का आह्वान भी किया। चीन ने संयुक्त बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए इस सप्ताह कहा था कि नौवहन विवाद का हल संबद्ध पक्षों द्वारा सीधे किया जाना चाहिए और इसमें किसी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं होना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हॉंग लेई ने कहा था कि हमारी राय है कि दक्षिण चीन सागर में विवाद का हल सीधे तौर पर संबद्ध देशों द्वारा बातचीत और विचारविमर्श के जरिये किया जाना चाहिए। इसमें किसी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं होना चाहिए।

Author: JAN TV Editorial Team

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