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तीन सदस्यीय बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय अपराध पंचाट के अध्यक्ष न्यायाधीश इनायतुर रहीम ने सजा सुनाते हुए कहा, ‘उसकी गर्दन को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक कि वह मर न जाए।’ पंचाट ने अपने फैसले में कहा कि निजामी ने जो अपराध किए हैं उनकी गंभीरता इतनी अधिक है कि वह मौत से कम की सजा के हकदार नहीं हैं। 71 वर्षीय जमात नेता के खिलाफ लगाए गए युद्ध अपराध के 16 आरोपों में से आठ बिना किसी शक के साबित हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि निजामी अदालत में मौजूद थे और जजों द्वारा 204 पन्नों का फैसला सुनाए जाने के समय वह भावशून्य खड़े रहे। फैसला सुनाए जाने में एक घंटे से अधिक का समय लगा। पंचाट ने कहा कि निजामी ने अत्याचार ढहाने के लिए इस्लाम की गलत व्याख्या की और जमात की छात्र शाखा, इस्लामी छात्र संघ के तत्कालीन अध्यक्ष के नाते उन्होंने संगठन को व्यापक पैमाने पर नरसंहार, विशेष रूप से प्रमुख प्रबुद्ध लोगों को निशाना बनाने के लिए कुख्यात अल बद्र मिलिशिया ताकतों में बदल दिया। युद्ध अपराध कानून के तहत निजामी सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती दे सकते हैं। वर्ष 2001 से 2006 के दौरान बीएनपी की अगुवाई वाली चार दलीय गठबंधन सरकार में मंत्री रहे निजामी युद्ध अपराधों में सजा पाने वाली अंतिम जानी मानी शख्सियत हैं। अवामी लीग द्वारा स्थापित दो विशेष पंचाटों ने अभी तक युद्ध अपराध के दस मामलों में फैसला सुनाया है।
Author: JAN TV Editorial Team
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