ललित मोदी प्रकरण से बीजेपी की पारदर्शी छवि को नुकसान पहुंचा हैं। इससे सुषमा स्वराज की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है. संसद के मानसून सत्र और आगामी बिहार चुनाव को देखते हुए पार्टी इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं दिख रही है. पीएम मोदी कोई कड़ा फैसला ले सकते हैं. सरकार और पार्टी सुषमा के पक्ष में खड़ी है , लेकिन उनकी स्थिति कमजोर होती जा रही है. पीएम नरेंद्र मोदी ने हमेशा सरकार में पारदर्शिता की बात कही है. उन्होंने लोकसभा चुनाव में भ्रष्टाचार के मुद्दे को जोर-शोर से भी उठाया था. ऐसे में इस मुद्दे पर उनके द्वारा किसी का बचाव करना मुश्किल लगता है. इधर खबर है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पीएम नरेंद्र मोदी को इस्तीफे की पेशकश की थी जिसे पीएम ने ठुकरा दिया। इस्तीफे की पेशकश के बाद पीएम ने पार्टी अध्यक्ष और संघ के बड़े नेताओं से बात की जिसके बाद तय किया गया है सुषमा से इस्तीफा नहीं लिया जाएगा. क्योंकि सुषमा के ईमेल में ब्रिटेन से ट्रेवल डॉक्यूमेंट्स मुहैया कराने के लिए कानून का पालन करने की बात कही गई थी.
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