विभिन्न विपक्षी दलों के बायकॉट के बावजूद लोकसभा में एससी-एसटी संशोधन विधेयक पारित हो गया। अनुसूचित जाति या अनुसूचित जाति अधिनियम 1989 के संशोधन बिल में उत्पीड़न के कुछ नए कृत्यों को जोड़ा गया है। लोकसभा में पारित विधेयक के तहत प्रावधान हुआ कि अगर कोई अगड़ी जाति का कर्मचारी अनुसूचित जाति या जनजाति के कर्मचारियों के प्रति दायित्वों का निर्वाह नहीं करेगा तो उसे छह माह से एक साल तक की सजा हो सकती है। इस विधेयक के पारित होने के साथ ही अब एससी या एसटी को किसी व्यक्ति विशेष के लिए मतदान के लिए बाध्य करना या फिर मतदान करने से रोकना भी दंडनीय अपराध होगा।
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