संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन नोटबंदी पर चर्चा चल रही है। कांग्रेस और भाजपा के बाद जदयू अध्यक्ष व सांसद शरद यादव ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि नोटबंदी से आम जनता, किसान, गरीब सभी के लिए दिक्कत हो गई है। देश में जेबकतरों की भरमार हो गई है। जनधन योजना के तहत बनाए गए अकाउंट भी फर्जी हैं। ऐसे में इस समस्या के समाधान के लिए सांसदों, विधायकों को जिम्मेदार बनाइए। उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की भी मांग की। आज सत्र की शुरुआत में सबसे पहले कांग्रेस की ओर आनंद शर्मा ने नोटबंदी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने सीधे-सीधे सरकार पर आरोप लगाया कि न तो नोटबंदी को लागू करने का तरीका ठीक है और न ही यह पूरा मिशन गोपनीय रखा गया। इससे जुड़ी तमाम सूचनाएं कई अखबारों में पहले ही छप गईं थीं। राज्यसभा में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सरकार ने 500ध्1000 रुपये के नोट पर पाबंदी तो लगा दी लेकिन गरीब मेहनतकश, मध्यमवर्ग के पास जो दिक्कतें आएंगी उस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में जाएं तो आपको अहसास होगा कि आर्थिक आपातकाल आ गया है। केंद्र सरकार ने बिना तैयारी के बड़े नोटों पर पाबंदी लगा दी है। मायावती ने कहा, आज राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होते तो अच्छा रहता।
इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।