राजनीतिक पार्टियों को टैक्ट छूट पर संदेह की स्थिति पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को कोई नई छूट नहीं दी गई है। इसके अलावा जेटली ने कहा कि कोई भी दल 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोटों में चंदा स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पिछले महीने ही अस्वीकार कर दिया गया था। पुराने नोट लेने वाले दल कानून का उल्लंघन करेंगे। ऐसा करने वाला कोई भी दल कानून का उल्लंघन करेगा। वित्त मंत्री ने साफ किया कि आईटी ऐक्ट, 1961 के सेक्शन 13। के तहत राजनीतिक दलों को अपने अकाउंट का ऑडिट, खर्च और आय की जानकारी और बैलेंस शीट जमा करानी होती हैं। इसके प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जेटली ने कहा कि पंजीकृत राजनीतिक दलों की आय पर ऐतिहासिक रूप से दी जाने वाली सशर्त टैक्स छूट जारी है। पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी की घोषणा के बाद या एनडीए सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में कोई नई छूट या रियायत नहीं दी है। राजनीतिक दल बैंकों को 30 दिसंबर तक पुराने नोटों में रखी गई नकदी जमा करा सकते है, बशर्ते वे संतोषजनक रूप से आय के स्रोत का संतोषजनक उत्तर दें और उनकी खाता पुस्तिका आठ नवंबर से पहले की प्रविष्टियां दर्शाती हो। अगर राजनीतिक पार्टियों के रिकॉर्ड में कोई असंगति पाई जाती है तो आयकर अधिकारी अन्य लोगों की तरह उनसे भी पूछताछ कर सकते हैं। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि उन्हें किसी तरह की छूट नहीं है और आयकर अधिकारी उनसे उसी तरह पूछताछ कर सकते हैं जैसे किसी अन्य से। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक पार्टियां 500 और 1000 रूपए के नोटों में चंदा नहीं ले सकतीं, क्योंकि ऐसे नोट अब वैध नहीं रह गए हैं। अधिया ने कई ट्वीट करके कहा कि राजनीतिक पार्टियों को कथित छूट से जुड़ी खबरें गलत और भ्रामक हैं। नोटबंदी और कर संशोधन कानून, 2016 लाने के बाद राजनीतिक पार्टियों को कोई छूट या विशेष सुविधा नहीं दी गई है।
इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।