मंगलवार को कानून एवं न्याय मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी रीता वशिष्ठ ने शीर्ष अदालत में दो पेज के अपने एफिडेविट के जरिए कहा कि इस योजना से अदालत को एक साल के लिए यह संवैधानिक विशेषाधिकार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विशेष अदालत उन 1,581 ममलों की सुनवाई करेगी जो उम्मीदवारों ने 2014 के लोकसभा चुनाव और आठ विधानसभा चुनाव में अपना हलफनामा दाखिल करते हुए जिक्र किया था।
सरकार की तरफ से यह एफिडेविट सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद दिया गया है जिसमें एक नवंबर को शीर्ष अदालत ने केन्द्र सरकार से आपराधिक केस में फंसे राजनेताओं के खिलाफ मामलों की शीघ्र सुनवाई स्पेशल कोर्ट गठन का रोडमैप तैयार करने का आदेश दिया था।
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