खाप पंचायत की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी शादी को कानूनी या गैरकानूनी ठहराने पर फैसला सिर्फ कोर्ट कर सकती है। खाप इससे दूर ही रहे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तारीख तय की है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि प्रेम विवाह करने वालों के खिलाफ खाप के फरमान पूरी तरह से गैरकानूनी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही केंद्र सरकार से कहा है कि खाप पंचायतों को प्रतिबंधित किया जाए।
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