इसका असर न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि नींद की कमी, आंखों में जलन, सिरदर्द और रिश्तों में दूरी जैसी शारीरिक व सामाजिक समस्याएं भी सामने आती हैं। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि दिन में कुछ समय 'नो-फोन टाइम' रखा जाए, रात को सोते समय मोबाइल दूर रखा जाए और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को सीमित किया जाए। जरूरत पड़ने पर काउंसलर या विशेषज्ञ से मदद लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। मोबाइल का संतुलित उपयोग ही नोमोफोबिया से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।
Author: JAN TV Editorial Team
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