विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और वैश्विक बाज़ार में डॉलर की मजबूती की वजह से रुपया दबाव में है। रुपया कमजोर होने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि आयातित सामान जैसे पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और दवाइयाँ महंगी हो जाएंगी।
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात काबू में नहीं आए, तो आने वाले हफ्तों में रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है। सरकार और रिज़र्व बैंक इस गिरावट पर नज़र बनाए हुए हैं, लेकिन फिलहाल राहत के आसार नज़र नहीं आ रहे।
Author: JAN TV Editorial Team
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