भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समीकरणों की दिशा बदलने वाली खबर सामने आई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने सुझाव दिया है कि भारत को आगामी व्यापार बातचीत में सबसे पहले अमेरिका द्वारा लगाए गए तेल संबंधी अतिरिक्त टैरिफ को हटवाने पर जोर देना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीदने के विरोध में लगाया गया था, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। अगर यह अधिभार हट जाता है, तो भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव 50% से घटकर करीब 25% रह जाएगा, जिसे कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण और फार्मा जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स में राहत की बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
जीटीआरआई ने सरकार के Board of Trade (BOT) से यह अपील भी की है कि आगामी बैठक में दो मुद्दों को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। पहला, Export Promotion Mission (EPM) को तुरंत लागू किया जाए क्योंकि आठ महीने बाद भी इसका केवल ढांचा तैयार है, योजना जमीन पर उतर नहीं पाई। दूसरा, अमेरिका पर तेल टैरिफ घटाने के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ाया जाए, ताकि भारत वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति पा सके। रिपोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि भारत ने रूसी कंपनियों से तेल खरीद में उल्लेखनीय कटौती की है, इसलिए अधिभार को जारी रखने का कोई तर्क शेष नहीं बचता।
Author: JAN TV Editorial Team
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