पेस्कोव ने स्पष्ट कहा कि पश्चिमी देशों की प्रतिबंध नीति और अमेरिका की टैरिफ रणनीति के बावजूद भारत–रूस तेल व्यापार न तो धीमा होगा और न ही घटेगा। उन्होंने बताया कि रूस भारत के व्यापार घाटे को गंभीरता से ले रहा है और भारतीय मशीनरी, दवाइयों, कृषि उत्पादों तथा अन्य वस्तुओं का आयात बढ़ाने के लिए ठोस योजना पर काम चल रहा है।
क्रीमलिन प्रवक्ता के अनुसार दोनों देशों को बाहरी दबाव से बचाने के लिए एक सुरक्षित और स्वतंत्र भुगतान तंत्र पर भी संयुक्त रूप से कार्य किया जा रहा है, जिससे रुपये–रूबल ट्रेड और वैकल्पिक वित्तीय रास्ते मजबूत होंगे।
पेस्कोव ने यह भी कहा कि भारत का निर्यात बढ़ाने के लिए रूस नई व्यापारिक खिड़कियां खोल रहा है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाज़ार मिल सकता है। यह कदम भारत–रूस व्यापार को अधिक संतुलित और स्थाई बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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