जानकारों के मुताबिक विदेशी पूंजी की निकासी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता जैसे कई दबावों के कारण निवेशकों की धारणा कमजोर बनी हुई है।
मुद्रा विशेषज्ञ अनुज गुप्ता ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय बाजार में नकारात्मक प्रवृत्ति पैदा की है।"
अर्थशास्त्री आकाश जिंदल ने कहा, "डॉलर के बढ़ने के कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं, लेकिन डॉलर की कीमत ज्यादा होने के नकरात्मक पहलुओं से ज्यादा हैं। मुझे उम्मीद है कि डॉलर और बढ़कर 92 रुपये हो जाएगा और यह भारत के लिए नकरात्मक हो सकता है।"
बाजार ऑपरेटरों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक को उसका प्राकृतिक स्तर खोजने की अनुमति दे रहा है और इसकी गिरावट को रोकने के लिए उसने बहुत कम दखल दिया है।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।