(DELHI, India)
उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर बताया कि यमुना नदी के प्रदूषण का मुख्य जरिया शहरों के नालों के जरिए अशोधित पानी को इसमें छोड़ा जाना है। जावडेकर ने बताया कि यमुनानगर, जगाधरी, करनाल, पानीपत , सोनीपत, दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, पलवल, वृंदावन, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद और इटावा आदि शहर गंदा पानी यमुना में छोड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि यमुना नदी में प्रदूषित जल छोड़ने वाले राज्यों में दिल्ली की भूमिका सबसे अधिक है और वजीराबाद से लेकर ओखला के बीच यमुना नदी बेहद प्रदूषित है। इसके बाद ओखला से लेकर चंबल के बीच यमुना सर्वाधिक प्रदूषित है। मंत्री ने बताया कि यमुना कार्य योजना के पहले और दूसरे चरण में कुल 1514.42 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं जिनमें राज्यों का भी हिस्सा है। इसके अलावा इस योजना के तीसरे चरण के लिए 1656 करोड़ रूपये की संशोधित लागत के साथ मंजूरी दी गयी है जिसे दिल्ली जल बोर्ड द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके अलावा हरियाणा का जन स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग 217. 87 करोड़ रुपये की लागत से सोनीपत और पानीपत में यमुना के प्रदूषिण को कम करने के लिए दो परियोजनाओं को लागू कर रहा है।
Author: JAN TV Editorial Team
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