(Rajasthan, India)
जैसे ही सूर्यदेव की लालिमा बिखरने लगी, बाजारों की रौनक भी बढ़ने लगी। शहर के मंदिरों में मंगला झांकी के साथ ही प्रभु दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। महिला, पुरुषों और बच्चों ने भी प्रिय कान्हा के जन्म की खुशी में उपवास रखा।शहर के राधा-गोविंददेवजी मंदिर, गोपीनाथजी राधा दामोदरजी और लाडली जी के मंदिर में जन्माष्टमी पर्व मनाया जा रहा है। मंदिरों में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है। हर साल की तरह गोविंददेवजी मंदिर में भी सुबह से ही जन्माष्टमी पर्व जैसा नजारा दिखाई दिया, मंगला झांकी से ही भक्तों की लंबी कतारें नजर आने लगी। कान्हा को अपलक निहारने को आतुर भक्तों ने अपने इष्ट के दर्शन किए। इस दौरान चारो ओर जय-जय श्रीराधे के जयकारे गूंजते रहे।मंदिर में दर्शनों के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। गोविंददेवजी मंदिर में जन्माष्टमी पर्व को मनाए जाने के कारण मुख्य द्वार से प्रवेश तो था, लेकिन निकलने के लिए मंदिर के पिछले द्वार से जयनिवास उद्यान से ही था। मंदिर से निकलने के लिए दूसरा रास्ता नहीं होने के कारण जहां दर्शनार्थियों को दर्शनों में दस मिनट लगे, वहीं निकलने में आधा घंटे से भी अधिक समय लग गया। इधर जयपुर के रामगंज स्थित लाड़ली जी के मंदिर में दोपहर 12 बजे जन्मोत्सव मनाया गया । मंदिर के महंत रामकिशोर गोस्वामी के अनुसार मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा होती है ऐसे में पिछले ढाई सौ सालों से जन्मोत्सव दोपहर में मनाया जाता है। जन्मोत्सव के मौके भगवान के बाल स्वरूप का पंचामृत से अभिषेक कर नए वस्त्र धारण कराए गए। इस मौकै पर नंद उत्सव के दौरान बधाई गायन का भी दौर शुरू हो गया है।
Author: JAN TV Editorial Team
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