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पर इस सप्ताह होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उनके सामने वजूद कायम रखने की चुनौती है क्योंकि इस बार वह जबरदस्त आंतरिक बगावत का सामना कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री और सत्तारूढ़ श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) के महासचिव मैत्रीपाला सिरीसेना समेत कुछ अन्य ने उनके खिलाफ बगावत कर दी और आठ जनवरी को होने वाले चुनाव में वह उन्हें चुनौती दे रहे हैं। विपक्ष में खेमाबंदी को देखते हुए तीसरा कार्यकाल पाने के लिए 2010 में अपनी जीत के बाद कानून में संशोधन करने वाले 69 वर्षीय राजपक्षे इस बार कमजोर दिख रहे हैं और जीत के प्रति भी भरोसेमंद नहीं है। लिट्टे की हार के बाद तीसरी बार छह साल का कार्यकाल पाने की उम्मीद बांधे राजपक्षे ने समय से दो साल पहले ही चुनाव का आह्वान किया। हालांकि, चुनाव के लिए सार्वजनिक तौर पर राजपक्षे की हिमायत करने वाले सिरीसेना ने अगले ही दिन आश्चर्यजनक ढंग से उनका साथ छोड़ते हुए चुनौती देने का एलान किया। इसके बाद तो राजनीतिक भूचाल आ गया और चुनाव के प्रति निराश विपक्ष को आस दिखने लगी। बगावत का बिगुल बजाने वाले मुख्य विपक्षी उम्मीदवार 63 वर्षीय सिरीसेना के कारवां से जुड़ने वाले अचला जगोदा 26 वें विधायक थे। राष्ट्रपति और उनके प्रतिद्वंद्वी दोनों बहुसंख्यक बौद्ध समुदाय से हैं और चुनाव में अल्पसंख्यक तमिल और मुस्लिम किसे वोट करते हैं, यह अहम होगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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