दुनिया के कई क्षेत्रों में पिछले दो दशक में अत्यधिक बर्फ पिघलने की वजह से ग्लेशियरों में भारी असंतुलन आया है। एक चैंकाने वाले अध्ययन का दावा है कि अगर जलवायु स्थिर रहती है तो भी ग्लेशियरों का पिघलना जारी रहेगा। स्विटजरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख में विश्व ग्लेशियर निगरानी सेवा के निदेशक माइकल जेम्प ने कहा, गौर किए गए ग्लेशियरों की बर्फ की मोटाई फिलहाल हर साल आधे से एक मीटर कम हो रही है। यह 20वीं सदी के औसत की तुलना में दो से तीन गुना अधिक है। इस अध्ययन के मुख्य लेखक भी रहे जेम्प ने बताया कि हालांकि बर्फ पिघलने का यह सटीक प्रमाण महज कुछ सैकड़ों ग्लेशियरों को लेकर है। अध्ययन करने वाली टीम के अनुसार, नार्वे में 19वीं सदी की तुलना में ग्लेशियर के दायरे में कमी आई है। विश्व ग्लेशियर निगरानी सेवा ने दुनियाभर में ग्लेशियरों में आए बदलाव पर 120 साल से ज्यादा के आंकड़े जुटाए हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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