ढाई दशक पहले 950 करोड़ से अधिक के चारा घोटाले के लिए चर्चित पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग से बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण फाइलें चोरी हो गईं हैं। यह काम बाकायदा तीन अलमारियों का ताला तोड़ कर किया गया। चोरी के बाद विभाग ने एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। चोरी गई फाइलों में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई महत्पूर्ण साक्ष्य व दस्तावेज भी बतौर अनुलग्नक होने के अनुमान हैं। सूत्रों का दावा है कि चोरी गई फाइलों में घोटाले में कुछ नेताओं की संलिप्तता के साक्ष्य के आलावा कई पशु चिकित्सक व अराजपत्रित कर्मियों के विरुद्ध चल रही विभागीय व न्यायिक कार्रवाइयों से जुड़े कागजात भी हैं। विकास भवन स्थित पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के पहले तल्ले से 25-26 अप्रैल की रात को फाइलें चोरी हुईं और एफआईआर दर्ज कराई गई 16 मई को। पहले तो विभागीय स्तर फाइलों को तलाशने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिलने पर 30 अप्रैल को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया। इसके बाद भी रस्साकशी चलती रही। आखिरकार निगरानी व विधि शाखा के प्रशाखा पदाधिकारी के आवेदन पर 16 मई को एफआईआर दर्ज हुई। इस संबंध में पूछने पर विभाग की सचिव एन. विजयलक्ष्मी ने कुछ भी आधिकारिक तौर पर बताने से मना कर दिया है।
इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।