उनके भाई इरोम सिंहजीत ने बताया कि अधिकारों के लिए होने वाले आंदोलनों का चेहरा बन चुकी शर्मीला यहां की स्थानीय अदालत में अपना उपवास खत्म करेंगी. शर्मीला को जीवित रखने के लिए कैदखाने में तब्दील हो चुके अस्पताल में उन्हें साल 2000 से ही नासिका में ट्यूब के जरिए जबरन भोजन दिया जा रहा था.
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