दरअसल, दिल्ली महिला आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की उस गाइडलाइन का हवाला दिया है, जहां पुलिस को रेप की सूचना मिलते ही जल्द से जल्द आयोग के क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर या रेप क्राइसिस सेल को जानकारी देकर पीड़ित के लिए काउंसलर मुहैया कराना होता है. ये विभाग दिल्ली महिला आयोग का हिस्सा होते हैं. जानकारी मिलने के बाद काउंसलर पीड़ित की काउंसलिंग करते हैं और FIR दर्ज करवाने से लेकर मेडिकल करवाने में उसकी मदद करते हैं.
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