पुराने लखनऊ में चौक की तहसीन की मस्जिद के नीचे टुंडे कबाबी की दुकान 1905 से चल रही है। फिल्म स्टार सलमान खान हो या फिर ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार जब भी वह लखनऊ आए उन्होंने इस पुरानी दुकान के कबाबों का जायका जरूर लिया है। योगी सरकार बनने के बाद बड़े का गोश्त मिलना बंद हो गया है। इसका सीधा असर टुंडे के कबाब मुबीन रहीम के यहां पर मिलने वाली बड़े की नहारी पर पड़ा।
अब यहां पर मटन की नहारी और कबाब बेची जा रही हैं। करीब 25 सालों से टुंडे के कबाब खा रहे जाफर बताते हैं कि लखनऊ में टुंडे से बेहतर बीफ के कबाब कोई नहीं बनाता है। टुंडे के कबाब ऐसे ही जायकेदार नहीं होते हैं उनमें 160 मसालों से तैयार किया जाता है।
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