लोगों को संविधान के तहत अपनी पसंद के खाने पीने का अधिकार है। उन्हें खाने की आजादी है। ये लोगों की रोजी रोटी से जुड़ा मसला है। कोर्ट ने ये भी कहा अवैध बूचड़खाने बंद हों लेकिन एक हफ्ते में लाइसेंस देने पर विचार हो और जिले में 2 किलोमीटर पर मीट की दुकानों की जगह दी जाए।
कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकार लोगों के खाने पर नियंत्रण नहीं कर सकती है। लखनऊ बेंच ने कहा कि 31 मार्च तक जिन दुकानों को लाइसेंस नहीं मिले थे उन्हें 1 हफ्ते में लाइसेंस पर विचार करना होगा और कोर्ट की गाइडलाइंस माननी होगी।
हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार अवैध बूचड़खानों को बंद करें लेकिन पूरी तरह से मीट पर बैन नहीं लगाया जा सकता है। संविधान में आर्टिकल 21 के तहत लोगों को जिंदगी जीने और उनकी पसंद के खान-पान का अधिकार है। इस अधिकार को कोई भी छीन नहीं सकता है। लखीमपुर खीरी नगर परिषद के रहने वाले मीट व्यपारी ने अपनी याचिका में कहा था कि वह बकरे के मीट का व्यापारी है और बार-बार अपील करने के बावजूद उसका लाइसेंस रिन्यू नहीं किया जा रहा है।
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