निलहों के खिलाफ चंपराण के किसान राजकुमार शुक्ल की अगुवाई में चल रहे तीन साल के पुराने संघर्ष 1917 में मोहनदास करमचंद गांधी ने व्यापक आंदोलन का रूप दिया। दरअसल गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका से भारत आगमन के बाद चंपारण का सत्याग्रह देश का पहला सत्याग्रह था। सत्य की राह पर चलकर असत्य का विरोध करने जैसी प्रतिज्ञा तो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में ही ले ली थी। अप्रैल 2017 को चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे हो रहे हैं।
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