डिजिटल प्रदर्शनी का शीर्षक होगा बापू को कार्यांजलि और एक पहल जो सिर्फ सांकेतिक नहीं होगी और न ही चंपारण सत्याग्रह के 100 साल को याद करने के लिए होगी। बल्कि बापू के सपने को साकार करने के लिए सरकार और प्रभावी कदम उठाने की शुरुआत भी करेगी।
सरकार का मानना है कि इन कोशिशों से सफाई को लेकर औऱ जागरुकता बढेगी औऱ जब महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ तक जन जन तक पहुंच जाएगी। सत्याग्रह का मतलब अब स्वच्छाग्रह होगा जिसमें स्वच्छ भारत बनाने में हर व्यक्ति का योगदान होगा।
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