आयुष के शहीद होने की खबर फैलते ही चकेरी के डिफेंस कॉलोनी स्थित उनके घर पर लोगों के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया। नौजवान बेटे की मौत पर मां सरला रो-रोकर बेसुध हो गई थीं। चिल्ला-चिल्लाकर एक ही बात कह रही थीं कि कोई मेरे लाल को ले आओ। परिवारीजन ढांढस बंधाने में लगे थे।
इस पर सरला ने कहा मुझे अपने बेटे पर गर्व है। मगर यह सरकार कब तक मांओं की कोख उजाड़ेगी। कब तक सैनिकों को शहीद होने के लिए बॉर्डर पर भेजा जाएगा। दूसरे कमरे में बैठे पिता अरुण कांत सिंह खुद को संभालने की कोशिश कर रहे थे। मगर पथराई आंखें उनकी असहनीय पीड़ा को बयां कर रही थी।
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