इस सार्क सेटेलाइट जरिए हम अपने पडो़सियों के विकास में भागीदार बनना चाहते हैं। यह प्रोजेक्ट भारत की ओर से पड़ोसी देशों के लिए अमूल्य उपहार है।'जीसैट -9 के अभियान से सभी सार्क देशों को जोड़ना आसान नहीं था। लेकिन अब इस उपग्रह से नेपाल, भूटान, मालद्वीव, बांग्लादेश और श्रीलंका को संचार सेवाएं आसानी से उपलब्ध होंगी। पहले इस कार्यक्रम का नाम सार्क सेटेलाइट था लेकिन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बाहर हो जाने के बाद इसका नाम बदला गया।
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