दूसरी ओर दलितों की योजना आगे तक की तय हो गई थी। छात्रवास के बाद गांधी पार्क में इकठ्ठा होकर शहर को जलाने की साजिश थी। इसके लिए महानगर के चारों मुख्यमार्गों पर कब्जा करने का प्लान तैयार किया गया था जिससे पुलिस बल एक जगह एकत्र न हो सके। सोशल साइट पर पूरी रणनीति तय हुई थी और एक दूसरे के साथ शेयर की गई थी। योजना के तहत ही लोग मंगलवार को छात्रवास पर एकत्र हुए। जैसे ही यहां पर पुलिस ने सख्ती की तो दलितों की भीड़ गांधी मैदान में पहुंच गई।
यहां पर भी पुलिस ने भीड़ को दौड़ा दिया और कुछ युवकों को हिरासत में भी लिया गया। इसके बाद योजना के तहत यहीं से महानगर में घुसने वाले सभी मुख्य मार्गों को कब्जे में लेने का मैसेज हुआ। भीम आर्मी के नेतृत्व में दलितों ने महानगर के मल्हीपुर रोड, चिलकाना रोड, बेहट रोड, दिल्ली रोड़, अंबाला रोड़ को कब्जे में लेकर हंगामा शुरू कर दिया। एक जगह फोर्स इकठ्ठा न हो इसके लिए महानगर के हर कौने पर हंगामा तोड़फोड़ और आगजनी की गई। फोर्स को डायवर्ट कर हथियारों के दम पर जमकर अराजकता फैलाई। जो चाहा वह किया और फोर्स मूकदर्शक बनी रही।
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