अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के जो नेता कश्मीरियों के हाथों में पत्थर थमाने के लिए जिम्मेदार हैं उनको घाटी के युवाओं के भविष्य की चिंता नहीं है लेकिन अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य का ख्याल जरूर है। उनके बच्चे पत्थरबाजी और हिंसा से दूर अच्छी तालीम ले रहे हैं और बेहतर जीवन जी रहे हैं। तो सवाल यह है कि क्या कश्मीर के युवाओं को अपना सुनहरा भविष्य देखने का हक नहीं है।
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