मिशन 2019: रामनाथ कोविंद की जीत से भाजपा ने नया सियासी समीकरण साधा
(DELHI, DELHI) यूपी के दलित समुदाय से आने वाले रामनाथ कोविंद को देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचाकर भाजपा ने 2019 के आम चुनाव के लिए सामाजिक समीकरणों की जमीन भी तैयार कर ली है। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति कोविंद अब भले ही भाजपा के सक्रिय नेता न रहे हों, लेकिन वह परोक्ष रूप से भाजपा के सबसे बड़े दलित चेहरा बन गए हैं। भाजपा की चुनावी रणनीति में दलित व पिछड़ा समीकरण सबसे ऊपर है। दोनों सर्वोच्च पदों पर दलित व पिछड़ा वर्ग के नेता उसकी नई पहचान बनते जा रहे हैं।

हालांकि भाजपा पहले भी छह साल सत्ता में रही है, लेकिन उस दौरान वह अपनी शहरी और अगड़े वर्ग की पार्टी की छवि से बाहर नहीं निकल पाई। मगर मोदी व शाह की रणनीति से अब स्थितियां बदल गई हैं। हरियाणा, यूपी से लेकर ओडिशा (निकाय चुनाव), असम व मणिपुर तक भाजपा की चुनावी सफलता में जो सामाजिक समीकरण बने थे वे कोविंद के राष्ट्रपति बनने से और मजबूत होंगे।

दलितों में भाजपा को लेकर झिझक दूर होगी। भाजपा ने अपनी रणनीति में एक और बदलाव किया है। पार्टी में दलित व पिछड़े नेता अब दलित व पिछड़ा मोर्चा की अगुआई तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पार्टी की मुख्यधारा का नेतृत्व करेंगे। इसी के तहत गुजरात समेत छह राज्यों के चुनाव में पार्टी तीन सीएम पिछड़े वर्ग से बना सकती है।
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