अभी तक वायुसेना में भर्ती होने वाले सैनिकों को युद्ध संबंधी सामान्य प्रशिक्षण ही दिया जाता है। इसलिए वायुसेना जवानों को सुरक्षा में लगाने के लिए उन्हें और प्रशिक्षण देने की जरूरत महसूस की गई है। दरअसल वायुसेना में सैनिक युद्ध की भूमिका में नहीं होते हैं बल्कि जंगी जहाजों से अफसर युद्ध लड़ते हैं।
भविष्य में नए भर्ती होने वाले गैर तकनीकी वायुसैनिकों को थल सेना में भी कुछ समय के लिए नियुक्त कर युद्धक अनुभव लेने का मौका दिया जा सकता है। वायुसेना ने कुछ समय पूर्व ही अपनी गरुड़ सेना को थल सेना में डेपुटेशन पर तैनात करना शुरू किया है। लेकिन गरुड़ सैनिकों की संख्या बहुत कम है। गरुड़ वायुसेना का विशेष फोर्स है जिसे दूसरे देश में घुसकर आपरेशन करने के मकसद से तैयार किया गया था। इसलिए गरुड़ के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है।
वायुसेना केंद्रों की सुरक्षा में अभी पूर्व सैनिकों की मदद ली जाती है। डिफेंस सिक्योरिटी कार्प करके अलग से एक बल बनाया गया है। दूसरे कुछ वायुसैनिक भी तैनात होते हैं। लेकिन इस सुरक्षा व्यवस्था को चौक-चौबंद नहीं माना गया है।
वायुसेना की संख्या करीब डेढ़ लाख है। इसमें से अगर अधिकारियों की संख्या घटा दी जाए तो करीब सवा लाख से भी अधिक वायुसैनिक हैं। इनमें 50-51 फीसदी तकनीकी सैनिक होते हैं। लेकिन जो बाकी वायुसैनिक हैं वे सुरक्षा बल की तरह पूर्ण तरीके से प्रशिक्षित नहीं होते।
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