लिखित जवाब में अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि शीर्ष अदालत ने अपने फैसले के जरिए एससी/एसटी एक्ट के अंतर को नहीं भरा बल्कि न्यायिक कानून के जरिए उसमें सुधार किया है। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि कार्यपालिका विधायिका और न्यायपालिका में शक्तियों का विभाजन किया गया था जो अलंघनीय है।
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