याचिकाकर्ता प्रताप सिंह बाजवा और अमी यागनिक ने अपनी याचिका में यह दलील दी है कि एक बार जब सांसदों की तरफ से दस्तखत किए गए महाभियोग नोटिस राज्यसभा के चेयरमैन के पास भेज दिया जाता है उसके बाद उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए एन्क्वायरी कमेटी गठित कराने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता है।
गौरतलब है कि कांग्रेस और छह अन्य विपक्षी दलों ने पिछले महीने दुर्व्यवहार के पांच आरोपों के आधार पर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया था। भारतीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ ऐसा नोटिस दिया गया हो। हालांकि, नायडू ने आरोपों की मैरिट में कोई दम नहीं होने की बात कह कर उसे खारिज कर दिया था।
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