तो फिर ऐसा इनसान उजाले से अंधेरे की तरफ कैसे चला गया? यह है वह सवाल, जिससे जम्मू एवं कश्मीर के समाजशास्त्री और राजनेता जूझ रहे हैं। वे 33 साल के असिस्टेंट प्रोफेसर मुहम्मद रफी भट की मौत को समझ नहीं पा रहे हैं। शोपियां जिले में रविवार को आतंकवादियों से सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में रफी का मारा जाना तर्क की कसौटी पर खरा नहीं उतर पा रहा है। कश्मीर में ऐसे कितने ही युवा हुए हैं जो हिंसा की धारा में बह गए।
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