पूर्व राष्ट्रपति ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और उन्होंने कांग्रेस की सरकारों में कैबिनेट में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली है। वो देश के रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। बता दें कि बीजेपी को आरएसएस का राजनीतिक ईकाई माना जाता है। इसके बावजूद प्रणब मुखर्जी के आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ अच्छे संबंध हैं। मुखर्जी के राष्ट्रपति पद पर कार्यकाल के दौरान दोनों की राष्ट्रपति भवन में दो से तीन बार मुलाकात भी हुई थी।
गौरतलब है कि गर्मियों के दौरान आरएसएस पूरे देश में अपने स्वयंसेवकों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करता है। तृतीय वर्ष का अंतिम प्रशिक्षण शिविर संघ के मुख्यालय नागपुर में आयोजित किया जाता है। अक्सर तृतीय वर्ष प्रशिक्षण हासिल करने के बाद ही स्वयंसेवक फुल टाइम प्रचारक बन सकते हैं।
इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।